उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उन चुनिंदा नेताओं में से हैं जो सिर्फ कुर्सी पर नहीं, जमीन पर भी लगातार सक्रिय रहते हैं। चाहे कोई आपदा हो, जनसमस्या हो या फिर किसी प्रदेशवासी की उपलब्धि धामी सीधे फोन उठाते हैं, बात करते हैं, समाधान करते हैं और खास पलों में बधाई भी देते हैं। यही वजह है कि उन्हें एक ‘जनमुखी मुख्यमंत्री’ कहा जाने लगा है। उनके एक फ़ोन से ना जाने कितने चहरो पर ख़ुशी आ जाती है.
आपदा में भी धामी की ‘कॉल ड्यूटी’
बीते महीने टिहरी जिले के घनसाली क्षेत्र में भारी बारिश के कारण एक गांव में भूस्खलन हुआ। घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री ने सीधे गांव के प्रधान से बात की, हालात जाने और तत्काल राहत सामग्री पहुंचाने के निर्देश भी दिए। यही नहीं, प्रभावित परिवारों के सदस्यों से खुद फोन पर बात कर उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार उनके साथ है।
जब एक छात्र को फोन कर दी बधाई
पिथौरागढ़ के रहने वाले निखिल भट्ट ने उत्तराखंड बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में राज्य में टॉप किया था। जब निखिल को मुख्यमंत्री का फोन आया, तो वो भावुक हो गया। धामी ने न सिर्फ उसे बधाई दी, बल्कि उसकी आगे की पढ़ाई के लिए हरसंभव सहायता का आश्वासन भी दिया।
शिकायत सुनी, समाधान तुरंत
हल्द्वानी की एक महिला ने सोशल मीडिया पर अपने मोहल्ले की सड़क की हालत को लेकर पोस्ट डाली थी। पोस्ट मुख्यमंत्री तक पहुंची और उन्होंने संबंधित अधिकारी को निर्देश देने के साथ उस महिला को खुद फोन किया। महिला ने बताया कि यह उनके जीवन का सबसे यादगार पल था कि मुख्यमंत्री ने खुद उनका हाल जाना।
खच्चर वाले के बेटे ने किया कमाल सीएम ने फ़ोन पर कहा तुमने गर्व से सीना चौड़ा किया उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग के रहने वाले अतुल कुमार ने कठिन परिश्रम करके और दिन रात केदारनाथ में घोड़े खच्चर चला कर आईआईटी में प्रवेश लिया मानो सीएम धामी का भी सीना चौड़ा गया मुक्यमंत्री धामी ने सीधे अतुल को ना केवल फ़ोन किया बल्कि इस कार्य के लिए उन्हें बधाई भी दी सीएम का कॉल आते थे ही अतुल बेहद खुश नजर आएं सीएम धामी ने अतुल से कहा है की सरकार उनकी हर सहायता करेगी ये बात करके अतुल बेहद खुश हो गए.
जनता से सीधा संवाद ही मेरी प्राथमिकता है धामी
मुख्यमंत्री धामी कई बार यह कह चुके हैं कि जनता से सीधा संवाद ही एक सशक्त लोकतंत्र की पहचान है। उनका मानना है कि अगर कोई नागरिक सरकार से जुड़ी बात कहता है, तो वह सुनी जाए यह मेरा कर्तव्य है।
राज्य सरकार ने जहां मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1905 जैसी योजनाएं शुरू की हैं, वहीं खुद मुख्यमंत्री का जनता से जमीन के साथ साथ फोन पर बात करना प्रदेशवासियों को सरकार से जोड़ता है।
