माटी के लाल” की संवेदनशीलता: जब मुख्यमंत्री धामी ने पिया झरने का जल और आपदा पीड़ित बुजुर्ग मां ने किया अपने बेटे सा दुलार

उत्तराखंड की धरती सिर्फ अपने नैसर्गिक सौंदर्य के लिए नहीं, बल्कि अपने लोगों के आत्मीय रिश्तों, परंपराओं और मानवीय मूल्यों के लिए भी पहचानी जाती है। हाल ही में एक नहीं, बल्कि दो तस्वीरें सोशल मीडिया पर भावनाओं का ज्वार ला रही हैं,दोनों ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सहजता, करुणा और प्रदेश से जुड़ेपन की मिसाल हैं।

 

पहली तस्वीर में मुख्यमंत्री एक आम नागरिक की तरह एक झरने से दोनों हाथों से जल ग्रहण करते दिखाई देते हैं। यह कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि एक संदेश है कि उत्तराखंड की भूमि, इसकी जलधाराएँ और संस्कृति ही हमारी असली ताकत हैं। जब प्रदेश का सर्वोच्च जनप्रतिनिधि खुद प्रकृति के इस अमूल्य उपहार को अपनाता है, तो यह भरोसा दिलाता है कि विकास और परंपरा साथ-साथ चल सकते हैं।

 

लेकिन उससे भी अधिक भावुक कर देने वाला दृश्य तब देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री हाल की प्राकृतिक आपदा से प्रभावित एक गांव में पीड़ितों से मिलने पहुँचे। वहाँ एक वृद्ध महिला ने उन्हें देखकर भावुक होकर उन्हें गले से लगा लिया और अपने बेटे की तरह दुलार दिया। यह दृश्य केवल एक मां और एक मुख्यमंत्री के बीच का नहीं था, बल्कि उस रिश्ते का प्रतीक था जो उत्तराखंड की जनता और उसके जनसेवक के बीच है।

 

मुख्यमंत्री सिर्फ राजनेता नहीं, बल्कि जनमानस के सच्चे प्रतिनिधि हैं। जब आपदा आती है, तो वे मोर्चे पर सबसे पहले पहुंचते हैं; जब कोई पीड़ित होता है, तो वे उसे गले लगाते हैं और जब संस्कृति की बात होती है, तो वे उसका हिस्सा बनकर उदाहरण पेश करते हैं

 

मुख्यमंत्री धामी का संदेश

 

उत्तराखंड की संस्कृति हमारी आत्मा है। विकास की हर योजना के केंद्र में हमारी परंपराएं और लोग हैं। मैं स्वयं को केवल मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि इस धरती का पुत्र मानता हूं। माँ जैसा स्नेह जब जनता से मिलता है, तो यह जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। हम प्रदेश में आई आपदा से जल्द उभर जाएंगे हम ओर हमारी सरकार हर एक व्यक्ति के साथ खड़ी है

 

 

आज के युग में जहाँ राजनीति प्रायः दिखावे और भाषणों तक सीमित हो जाती है, वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की यह दोनों तस्वीरें हमें यह विश्वास दिलाती हैं कि सच्चा नेतृत्व वहीं होता है जहाँ संवेदनशीलता, परंपरा और ज़मीन से जुड़ाव एक साथ दिखे।

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