देहरादून के पुराने रोडवेज डिपो परिसर में बन रही राज्य की पहली ग्रीन बिल्डिंग एक बार फिर सुर्खियों में है। निर्माण में लगातार हो रही देरी और विभागीय कार्रवाई के बाद अब यह परियोजना राजनीतिक निशाने पर आ गई है। कांग्रेस के साथ-साथ बीजेपी के वरिष्ठ नेता भी सरकार से स्पष्टीकरण मांग रहे हैं।
अब तक क्यों नहीं पूरा हुआ काम?
जानकारी के अनुसार 206 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की जा रही इस अत्याधुनिक ग्रीन बिल्डिंग को इस साल अक्टूबर तक बनकर तैयार होना था। एक ही परिसर में सभी विभागों को एकत्र करने के उद्देश्य से शुरू की गई यह परियोजना कभी त्रिवेंद्र सरकार की बड़ी घोषणा थी, जिसे मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने भी अपने प्रमुख प्रोजेक्ट्स में शामिल किया था।
बावजूद इसके, निर्माण स्थल पर अभी तक केवल खुदाई का काम ही चल पाया है। पिछले दिनों खनन विभाग ने अनियमितताओं का हवाला देते हुए साइट पर चल रही एक पोकलेन मशीन को सीज़ कर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। इससे पहले भी जिला प्रशासन निर्माण एजेंसी पर कार्रवाई कर चुका है।
हरीश रावत का आरोप—केंद्र का पैसा वापस लौट रहा
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने परियोजना को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रावत का कहना है कि केंद्र से प्राप्त फंड समय पर कार्य पूरा न होने के कारण वापस लौट रहे हैं, जो गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि परियोजना से जुड़े भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की खबरें चिंता पैदा करने वाली हैं और सरकार को जल्द हस्तक्षेप करना चाहिए।
गोदियाल बोले—राजधानी के हाल ऐसे, तो पहाड़ों का अंदाजा लगाइए
कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि यदि राजधानी के हृदय स्थल में स्थित प्रमुख प्रोजेक्ट की यह स्थिति है, तो दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में बन रहे स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी इमारतों की स्थिति का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।
त्रिवेंद्र सिंह रावत की दो-टूक—काम की शुरुआत और समाप्ति, दोनों की तारीख तय होनी चाहिए
इस मुद्दे पर पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि किसी भी निर्माण कार्य के शिलान्यास के समय उसकी पूर्णता की तिथि निर्धारित होती है। यदि तय समयसीमा में परियोजना पूरी नहीं होती, तो जवाबदेही तय करना और दोषी एजेंसी पर कार्रवाई करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि देरी से लागत में भारी बढ़ोतरी होती है, जो राज्य के हित में बिल्कुल नहीं है।
