हरिद्वार, भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक राजधानी, अब न केवल तीर्थयात्रियों का केंद्र है, बल्कि विकास और आधुनिकता की नई मिसाल भी बन रहा है। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) के उपाध्यक्ष अंशुल सिंह के नेतृत्व में शहर और आसपास के क्षेत्रों में अभूतपूर्व विकास कार्य हो रहे हैं, जिन्हें स्थानीय लोग और पर्यटक खूब सराह रहे हैं। गंगा के तट पर बसी इस पवित्र नगरी में खेल के मैदान, पार्क, और गंगा किनारे वॉकवे ट्रैक जैसे सौंदर्यीकरण कार्यों ने हरिद्वार को एक नई पहचान दी है।
अंशुल सिंह: विकास का नया चेहरा
हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अंशुल सिंह ने अपने कार्यकाल में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास को प्राथमिकता दी है। उनकी दृष्टि केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी पार्क और खेल के मैदानों के निर्माण पर जोर दिया गया है। हाल ही में एक प्रेस वार्ता में अंशुल सिंह ने कहा, “हमारा लक्ष्य हरिद्वार को न केवल धार्मिक पर्यटन का केंद्र बनाना है, बल्कि इसे एक ऐसी जगह बनाना है जहां लोग स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली जी सकें।”
खेल के मैदानों का निर्माण: नई पीढ़ी को प्रोत्साहन
हरिद्वार, जो पहले मुख्य रूप से अपने घाटों और मंदिरों के लिए जाना जाता था, अब खेल और युवा ऊर्जा का केंद्र बन रहा है। अंशुल सिंह के नेतृत्व में एचआरडीए ने शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कई खेल के मैदानों का निर्माण शुरू किया है। इन मैदानों का उद्देश्य युवाओं को खेलकूद के लिए प्रोत्साहित करना और स्थानीय स्तर पर खेल प्रतिभाओं को निखारना है। इन प्रयासों से हरिद्वार अब धार्मिक नगरी के साथ-साथ खेल गतिविधियों के लिए भी पहचान बना रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ये मैदान न केवल युवाओं के लिए मनोरंजन का साधन हैं, बल्कि सामुदायिक एकता को भी बढ़ावा दे रहे हैं।
गंगा किनारे वॉकवे और सौंदर्यीकरण: पर्यटन को नया आयाम
हरिद्वार में गंगा नदी के किनारे सौंदर्यीकरण के कार्य ने शहर की खूबसूरती को और निखारा है। अंशुल सिंह के निर्देशन में गंगा के तट पर बनाए गए वॉकवे ट्रैक न केवल स्थानीय लोगों के लिए सुबह-शाम की सैर का शानदार विकल्प बन गए हैं, बल्कि पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र हैं। ये ट्रैक स्वच्छ, सुरक्षित और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर हैं, जो गंगा के शांत वातावरण के साथ मिलकर एक अनूठा अनुभव प्रदान करते हैं। इसके अलावा, हर की पौड़ी और अन्य प्रमुख घाटों के आसपास किए गए सौंदर्यीकरण कार्यों ने शहर को और आकर्षक बनाया है।
हाल ही में हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर के विकास को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र में बिना किसी भवन को तोड़े सौंदर्यीकरण के कार्य किए जाएंगे। इस परियोजना में खुले स्थानों का विकास और भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसका श्रेय एचआरडीए की सक्रियता को जाता है।
पार्क और हरियाली: शहर को नया जीवन
शहर में नए पार्कों का निर्माण भी अंशुल सिंह के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण कदम है। ये पार्क न केवल बच्चों और परिवारों के लिए मनोरंजन का साधन हैं, बल्कि शहर की हरियाली को बढ़ाने में भी योगदान दे रहे हैं। नारसन बॉर्डर पर बनाया जा रहा भव्य स्वागत द्वार, जो अब अपने अंतिम चरण में है, हरिद्वार की भव्यता को और बढ़ाएगा। यह स्वागत द्वार पर्यटकों के लिए एक नया लैंडमार्क साबित होगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में विकास: समावेशी दृष्टिकोण
अंशुल सिंह का विजन केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में भी विकास कार्यों को प्राथमिकता दी है। ग्रामीण इलाकों में पार्क, खेल के मैदान और बुनियादी सुविधाओं के विकास ने स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाया है। इससे न केवल ग्रामीण युवाओं को अवसर मिल रहे हैं, बल्कि पर्यटन को बढ़ावा देने में भी मदद मिल रही है।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासियों ने अंशुल सिंह और एचआरडीए के प्रयासों की खुलकर तारीफ की है। एक स्थानीय निवासी रमेश चंद्र ने कहा, “पहले हरिद्वार केवल कुंभ मेले और धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता था, लेकिन अब हमारे बच्चे खेल के मैदानों में समय बिता रहे हैं, और गंगा किनारे वॉकवे पर सैर करना एक शानदार अनुभव है।” पर्यटक भी इन बदलावों से प्रभावित हैं। दिल्ली से आए एक पर्यटक ने बताया, “हरिद्वार अब पहले से कहीं ज्यादा सुंदर और व्यवस्थित लगता है। वॉकवे और पार्क शहर को एक नया आकर्षण दे रहे हैं
